कोडरमा:
जिला अंतर्गत चितरपुर मौजा की लगभग 16 एकड़
भूमि पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वर्षों से कब्जा किए जाने के मामले में
महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है। इस मामले का लंबे समय से ग्रामीणों द्वारा विरोध
किया जा रहा था। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि कुछ लोगों द्वारा जाली कागजात
तैयार कर उक्त जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है।
ग्रामीणों
ने इस संबंध में विभिन्न सरकारी विभागों एवं प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन देकर
जांच एवं कार्रवाई की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला भू अर्जन
पदाधिकारी, कोडरमा के कार्यालय में “संदेहात्मक जमाबंदी वाद संख्या 02/26” दर्ज
कर अवैध कब्जाधारियों को नोटिस जारी किया गया था।
उक्त
वाद की सुनवाई के दौरान आज कब्जाधारियों की ओर से उनके अधिवक्ता ओंकार विश्वकर्मा न्यायालय में उपस्थित हुए और उन्होंने दलील देते
हुए पुरे मामले और ग्रामीणों के विरोध पर पूरा व्याख्यान रखा साथ ही न्यायालय में प्रस्तुत पक्ष सभी दस्तावेज की मूल
छाया प्रति विभाग को सौपते हुए बताया की मूल दस्तावेज ग्राम पंचायत में जमा किया
गया है और अब उक्त भूमि पर कभी किसी प्रकार का दावा प्रस्तुत नहीं करेंगे उन्होंने
न्यायालय में कहा कि संबंधित वाद से उन्हें मुक्त माना जाए। साथ ही कब्जाधारियों
की ओर से न्यायालय में एक शपथ पत्र भी दाखिल किया गया, जिसमें
अवैध कब्जा छोड़ने की बात कही गई है।
न्यायालय
ने इस मामले पर टिपण्णी करते हुए कहा की उन्होंने अपने जीवन काल में ऐसा पहला
मामला देख रहे है की कोई व्यक्ति स्वयं न्यायालय में उपस्थित हो कर अवैध कागज के
आधार पर कब्ज़ा किये जमीन को स्वतः कब्जामुक्त कर रहा है| इस तरह अगर लोग मानसिकता
बनाते है तो जमीन के विवाद काफी कम होंगे और न्यायालय में मुकदमा का बोझ भी कम
होगा,
इस घटनाक्रम के बाद ग्रामीणों में संतोष
देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों के संघर्ष और प्रशासनिक प्रयासों
के बाद अब न्याय मिला है ।

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