पीड़िता ने उपायुक्त से लगाई गुहार, भू-माफियाओं और अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप
कोडरमा जिला लंबे समय से अपने काले पत्थर (ब्लैक स्टोन) के लिए पूरे बिहार-झारखंड क्षेत्र में प्रसिद्ध रहा है। पड़ोसी राज्यों के लगभग हर जिले में यहां के पत्थरों की भारी मांग रहती है। इसी मांग के कारण वर्षों से जिले में खनन माफियाओं का दबदबा बना हुआ है। कुछ कारोबारी वैध तरीके से खनन कर सरकार को रॉयल्टी देते हैं, जबकि बड़ी संख्या में अवैध खनन कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
पिछले एक दशक में कोडरमा में पत्थर खनन का दायरा कुछ कम जरूर हुआ है, लेकिन अवैध खनन का नेटवर्क अब भी सक्रिय है। आरोप है कि खनन माफिया स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर सरकारी जमीन और किसानों की उपजाऊ भूमि पर अवैध खनन कर रहे हैं।
मरकच्चो से सामने आया गंभीर मामला
हाल ही में मरकच्चो थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता जूही प्रवीण ने 14 मई 2026 को कोडरमा उपायुक्त को आवेदन देकर आरोप लगाया कि कुछ भू-माफिया उनकी कृषि योग्य जमीन पर जबरन कब्जा कर अवैध खनन कर रहे हैं।
आवेदन में उन्होंने देवेन्द्र मेहता, संतोष मेहता, बासुदेव मेहता, रविन्द्र कुशवाहा और पंकज मेहता समेत अन्य लोगों पर 10 एकड़ से अधिक जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया है।
पीड़िता के अनुसार, उनके ससुर अब्दुल अंसारी को बहला-फुसलाकर एक ही जमीन का कई बार अलग-अलग लोगों के नाम पर एग्रीमेंट कराया गया। बाद में उन्हीं एग्रीमेंट के आधार पर पूरी जमीन पर कब्जा कर लिया गया। आरोप है कि तय राशि भी पूरी तरह नहीं दी गई, जिससे मानसिक तनाव में उनके ससुर को ब्रेन हेमरेज हुआ और बाद में उनकी मृत्यु हो गई।
“सभी एग्रीमेंट फर्जी और मनमाने”
जूही प्रवीण ने उपायुक्त को दिए आवेदन में कहा है कि आरोपियों द्वारा किए गए सभी एग्रीमेंट पहली नजर में ही फर्जी प्रतीत होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एग्रीमेंट की शर्तें केवल लेख्यधारियों के हित में रखी गईं, जबकि जमीन मालिकों के अधिकारों की अनदेखी की गई।
उन्होंने यह भी कहा कि एक ही जमीन को अलग-अलग लोगों के नाम पर कई बार एग्रीमेंट किया गया और अब उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उनकी जमीन के साथ-साथ सरकारी भूमि पर भी खनन किया जा रहा है।
पीड़िता का कहना है कि अवैध खनन के कारण उनकी उपजाऊ कृषि भूमि पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। इतना ही नहीं, खेत पर जाने पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है।
अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप
जूही प्रवीण ने बताया कि उन्होंने इससे पहले भी 16 जनवरी 2026 को शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि संबंधित विभाग के अधिकारी खनन माफियाओं से मिलीभगत कर मोटी रकम लेकर मामले को दबा देते हैं।
उन्होंने कहा,
“इंसानियत और इंसाफ खत्म हो गया है। जिसके पास न्याय मांगने जाते हैं, वही रंग दिखाता है।”
पीड़िता ने विशेष रूप से खनन विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
चार अलग-अलग एग्रीमेंट का आरोप
आवेदन में वर्ष 2016 और 2023 में किए गए चार अलग-अलग एग्रीमेंट का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि इन एग्रीमेंट के जरिए खाता संख्या 217 के कई प्लॉटों की जमीन 20 से 30 वर्षों के लिए बेहद कम कीमत पर लीज पर ली गई।
पीड़िता के अनुसार:
कई एग्रीमेंट में जमीन का वास्तविक रकबा बढ़ाकर दिखाया गया।
कई प्लॉटों की जानकारी अधूरी रखी गई।
अग्रिम भुगतान और वार्षिक राशि का उल्लेख होने के बावजूद जमीन मालिकों को पूरी रकम नहीं दी गई।
सभी शर्तें केवल खनन करने वालों के पक्ष में रखी गईं।
सरकारी जमीन पर भी अवैध खनन का आरोप
आवेदन में यह भी कहा गया है कि आरोपियों ने मरकच्चो मौजा के कई प्लॉटों पर खनन कार्य के लिए 18 जुलाई 2023 को डीड संख्या 3463 के तहत अनुमति ली, लेकिन जमीन मालिकों को नाममात्र की राशि दी गई।
पीड़िता का आरोप है कि अब खनन माफिया सरकारी गैरमजरूआ जमीन पर भी धड़ल्ले से खनन कर रहे हैं और उनकी कृषि योग्य भूमि को भी खोद डाला गया है।
“पार्टनर बनाने का झांसा देकर जमीन हड़पी”
जूही प्रवीण ने कहा कि उनकी जमीन पूरी तरह उपजाऊ थी। आरोपियों ने परिवार को पार्टनर बनाने और मोटी रकम देने का लालच देकर धीरे-धीरे पूरी जमीन अपने कब्जे में ले ली।
उन्होंने उपायुक्त से तत्काल अवैध खनन पर रोक लगाने, जमीन की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
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