जयनगर थाना कांड संख्या 58/20 में सेशन ट्रायल 107/25 का फैसला, करीब 13 माह से मंडल कारा में बंद था आरोपी
कोडरमा। जयनगर थाना क्षेत्र में वर्ष 2020 में हुई हत्या के मामले में करीब छह वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद माननीय न्यायालय श्री राकेश चंद्रा की अदालत ने आरोपी नूर आलम को साक्ष्यों के परीक्षण और बचाव पक्ष की प्रभावी दलीलों के बाद दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया। यह मामला जयनगर थाना कांड संख्या 58/20 तथा सेशन ट्रायल संख्या 107/25 से संबंधित है।
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| हरीशंकर कुमार (अधिवक्ता ) |
मामले के अभिलेख के अनुसार, घटना के बाद घायल अवस्था में सदर अस्पताल, कोडरमा में इलाजरत पीड़ित का पुलिस पदाधिकारी के समक्ष बयान दर्ज किया गया था। दस्तावेज में दर्ज बयान के अनुसार, पीड़ित ने घटना में नूर आलम एवं एक अन्य व्यक्ति की संलिप्तता बताई थी। बाद में उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी में तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर अनुसंधान प्रारंभ किया गया।
उपलब्ध अभिलेख में दर्ज विवरण के मुताबिक, पुलिस ने घटना के संबंध में कार्रवाई करते हुए मामले को जयनगर थाना भेजा था, जहां अनुसंधान की जिम्मेदारी पुलिस पदाधिकारी को सौंपी गई। मामले में दो आरोपियों का नाम सामने आया, जिनमें से एक आरोपी अब भी फरार बताया जा रहा है, जबकि आरोपी नूर आलम के विरुद्ध न्यायालय में विचारण चला।
इस मामले में नूर आलम करीब 13 माह तक मंडल कारा, कोडरमा में विचाराधीन बंदी के रूप में निरुद्ध रहा। लंबे समय तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य तथा अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का न्यायालय द्वारा परीक्षण किया गया।
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| बिरजू पासवान (अधिवक्ता) |
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता हरीशंकर कुमार एवं अधिवक्ता बिरजू पासवान ने आरोपी नूर आलम की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए अभियोजन के साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों पर विस्तार से बहस की। बचाव पक्ष ने न्यायालय के समक्ष अभियोजन के साक्ष्यों में मौजूद कमियों एवं विरोधाभासों को रखते हुए आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किए जाने की मांग की।
अंततः माननीय न्यायालय श्री राकेश चंद्रा की अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों तथा बचाव पक्ष की दलीलों का परीक्षण करने के बाद आरोपी नूर आलम को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया।
गौरतलब है कि मामले में घटना के समय दर्ज किए गए कथन को अभियोजन के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया था, बावजूद इसके लंबे न्यायिक परीक्षण के बाद अदालत ने उपलब्ध समस्त साक्ष्यों का मूल्यांकन करते हुए आरोपी को दोषी नहीं पाया। वहीं, मामले का एक अन्य आरोपी फरार रहने के कारण उसके विरुद्ध कार्रवाई अभी लंबित है।
करीब छह वर्षों तक चले इस मामले में एक ओर जहां आरोपी को लगभग 13 माह जेल में विचाराधीन बंदी के रूप में रहना पड़ा, वहीं अंततः न्यायालय के फैसले के बाद उसे दोषमुक्त कर दिया गया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता हरीशंकर कुमार और बिरजू पासवान की ओर से की गई बहस भी सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण रही।

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